किसी भी कार्य की सकुशल संचालन के लिए पहली आवश्यकता होती किसी सेनापति की, जिसके नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम को निर्विघ्न संपन्न कराया जा सके. पूर्वजों द्वारा स्थापित इस भव्य सार्वजनिक यज्ञ (होम) के लिए भी नेतृत्व हेतु किसी एक व्यक्ति को 'जगपतिÓ नियुक्त करने की परंपरा शुरू हुई, लेकिन जगपति अपने नाम के अनुरूप होम संचालित करने का एक अतिविशिष्टि ओहदा था. सारे कार्यक्रम जगपति के निर्देश पर होते थे और इस पद पर यहां के नौज्यूला के प्रतिष्ठत व्यक्ति को आसीन किया जाता था. कालांतर में विभिन्न थोकों के विस्तार होने से व्यवस्थाओं में भी परिर्वतन हुए.
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फिर उत्तराखंड की उपेक्षा
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