Friday, June 18, 2010
फिर नहीं हुई मुलाकात...
एक बार की बात है, जब जगदी की सारी बहनें बाड़ाहाट स्नान के लिए गई थीं. मेला चल रहा था. स्नान आदि के बाद सारी डोलियां नाच रही थीं. नाचते-नाचते हिंदाव की जगदी का छत्तर अखोड़ी वाली जगदी से टकरा गया. कहते हैं हिंदाव की जगदी का छत्तर अखोड़ी की जगदी के आंख में लग गया. हिंदाव की जगदी की टक्कर से अखोड़ी वाली जगदी की आंख चोटिल हो गई. दंतकथा एवं भ्रांतियां हैं कि तब अखोड़ी वाली देवी ने जगदी को खूब खरी-खोटी सुनाई और अगली बार इस घटना का बदला लेने की चेतावनी दी. बताते हैं तब से लेकर आज तक अखोड़ी वाली जगदी और हिंदाव की जगदी का मिलन नहीं हुआ.
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फिर उत्तराखंड की उपेक्षा
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मैं गोविंदलाल आर्य, जनपद टिहरी गढ़वाल उ ाराख ड का मूल निवासी एवं वर्तमान में नवी मुंबई के नवीन पनवेल का रहिवासी हंू. मेरा ज म ०१ जनवरी १९७५...
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